गुरुवार, 20 अगस्त 2015

आदिवासी प्रश्न-वायनाड(केरल) के सन्दर्भ में

केरल राज्य में एक बड़ी ही प्यारी सी जगह है वायनाड | कैलिकट, ऊटी, मैसूर और कुर्ग जैसी घूमने में प्यारी जगहों के पास है यह जिला | प्रकृति ने इसे सजाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है | चाय और कॉफ़ी के बगान तो कहीं नारियल और सुपारी के पेड़, छोटी-छोटी सुन्दर पहाड़ियां, हाथी,बाघ,हिरण, चिड़ियों और तितलियों से भरे घने जंगल,  हंसती-गाती नदियाँ और खिलखिलाते झरने | पश्चिम घाट की गोद में बसे इस हिल स्टेशन की शोभा ही निराली है | लाखों देसी-विदेशी सैलानियों के मन को हरने वाली है यह जगह | लेकिन इस जगह का एक सच और भी है |

केरल राज्य में सबसे ज्यादा आदिवासी जनसंख्या वाला जिला है वायनाड | कुरिचिया, कुरमा, पणीया, अडिया, काट्टूनाइकर, उराली जैसी आदिवासी जातियां यहाँ बस्ती है | इनमे  पणीया, अडिया, काट्टूनाइकर आदिवासी जातियों की अवस्था काफी सोचनीय है | अपनी जमीन से विस्थापित, मजदूरी कर जीने को मजबूर, शराब और नशे के हाथों अपनी जिन्दगी दांव पर लगाते ये लोग वाकई में समय की तेज चाल में अपने को लाचार महसूस कर रहे हैं |

वायनाड में पिछले साल जिला कलक्टर बन कर आने के बाद इन आदिवासियों की दशा को जानने के लिए हमने 'ट्राइबल हेल्पलाइन एंड वेलफेयर मोनिटरिंग सेल' का गठन किया और  हमारी टीम ने "कॉलोनी मित्रम " नाम से हर महीने जिले के सभी अधिकारीयों के साथ आदिवासी कॉलोनी भ्रमण की शुरुआत की | बहुत सारी छोटी-छोटी समस्याएँ सुलझाने में और इन लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुँच बढ़ने के साथ एक अपनेपन की भावना जगाने में इस प्रोग्राम से काफी मदद मिली लेकिन धीरे-धीरे यह भी समझ आ रहा है की इनकी समस्याओं की जड़ें काफी गहरी है और इसे सुलझाने में वक़्त लगेगा | महीने में एक बार आदिवासी संगठनों के साथ मीटिंग भी काफी फलप्रद रही है |

शोषण का मकडजाल सा फैला है | आदिवासी गरीब है, भोला-भाला है और यही वजह है की सौ में नब्बे लोग उसे ठगने को तैयार बैठे हैं | वो अपना घर बनाने के लिए किसी ठेकेदार पर भरोसा करे तो उसे मिलता है अधूरे ख्वाबों सा अधूरा घर | शराब के चंगुल में फंसा कर उससे दस से बारह घंटे तक काम निकलने को  भी कुछ अमानवीय लोग तैयार बैठे हैं | आदिवासी स्त्रियों के शोषण को भी कामुक लोग अवसर की तलाश में रहते हैं |  खैर, कानून के शिकंजे के कसने के बाद अब ऐसे लोगों में डर पैदा हो रहा है जो कि शुभ संकेत है |

वायनाड जिले में अपनी तरह की एक अनूठी पहल में हम लोगों ने आदिवासी घरों के निर्माण के लिए हर पंचायत में एक आदिवासी भवन निर्माण सोसाइटी की स्थापना करवाई जो की अब अपना कमाल दिखाना शुरू कर रही है | बेनामी और बेईमान  ठेकेदारों के खिलाफ भी कड़ी कारर्वाई की जा रही है |

शिक्षा और अच्छी नौकरी ही मेरे विचार में इन लोगों को इनकी वर्तमान अवस्था से उबरने में मदद कर सकती है | इनका जो स्वाभिमान और अपनी भाषा-सभ्यता-संस्कृति पर गर्व खो सा गया है, इनके अपने गीतों की जो लड़िया टूट सी गयी है, इनकी लोककथाओं का जो हिस्सा गुम सा गया है, उसे वापस लाने के लिए इन्हें अच्छी शिक्षा और रोजगार से सशक्त करना बहुत ही जरुरी है |

आज का एक अनुभव आप लोगों के साथ बांटना चाहूँगा | आदिवासी लोगों के बीच काफी अच्छा काम कर रही सामाजिक कार्यकर्त्ता धन्या के निमंत्रण पर चीरपम नाम की आदिवासी कॉलोनी में आज शाम को गया | करापुज़ा बाँध के पास बसी इस पनिया कॉलोनी में एक भी पक्का घर नहीं था, बिजली नदारद थी, शौचालय का पता नही था और पीने का पानी एक कच्चे कुँए से आ रहा था जो बिलकुल भी पीने लायक नहीं था | आज तक वायनाड में सैकड़ों कॉलोनी मैंने घूमी है लेकिन इस कॉलोनी की दशा को देखकर मन भारी हो गया | पास में एक शानदार सा रिसोर्ट मानों इस कॉलोनी और इसके दयनीय निवासियों को मुंह चिढ़ा रहा था |

इस कॉलोनी के लोग करापुज़ा बाँध के बनने के बाद विस्थापित हुए लोग थे जिन्हें जमीन के कागज दिए गए थे, पर वो जमीन कहाँ हैं उन्हें पता तक नहीं था | कॉलोनी में तीस के आसपास घर थे और थे आशा से भरे हुए पच्चीस छोटे- छोटे बच्चे | इन्ही बच्चों की पढाई का स्तर सुधारने की पहल करने धन्या यहाँ आई थी | जिले के मुख्यालय से दस किलोमीटर दूर इस कॉलोनी की विडम्बना यह की इन लोगों को अब यह लगता ही कि किसी से शिकायत करके कुछ होनेवाला नहीं है | मैं अपने कार्यालय में जनता से बिना किसी रोक-टोक के मिलता हूँ और कोई भी कभी भी मुझसे कार्यालय में मिलने आ सकता है, ऐसी व्यवस्था मैंने रखी है, इसके बावजूद इस कॉलोनी की दयनीय दशा के बारे में मेरे पास कोई भी शिकायत या सुझाव नहीं पंहुचा था |

खैर, इस सप्ताह इस कॉलोनी के लोगों के साथ ओणम मानाने की तयारी है और लगभग एक से दो महीने के समय में इन लोगों को इनकी जमीन और फिर घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता देने के लिए हमारी टीम प्रतिबद्ध है | इस ओणम में इस कॉलोनी के लोगों खासकर बच्चों के जीवन में फूलों के रंग खिल सके, इसीमे इस ओणम की सार्थकता होगी, इसीमे महाबली जो ओणम के समय अपने प्यारे केरल प्रदेश को देखने आते हैं, को संतोष की प्राप्ति होगी | आप सभी को भी ओणम की शुभकामनाएं |
केशवेन्द्र कुमार आईएएस
जिला कलक्टर वायनाड
 

शुक्रवार, 20 मार्च 2015

सिविल सेवा परीक्षा 2015 का नोटिस UPSC 2015 NOTIFICATION (SYLLABUS AND ELIGIBILITY CRITERION)

http://www.upsc.gov.in/exams/notifications/2015/CSP_2015/CSP_2015_hindi.pdf

साथियों, अपने ईमेल और ब्लॉग पर मुझे आप कई साथियों के मेल मिलते हैं जिसमे सिविल सेवा के बारे  में, इसके पाठ्यक्रम, इसमें बैठने के लिए योग्यता, उम्र, कौन से विषय उपलब्ध हैं जैसे प्रश्न होते हैं. सिविल सेवा के बारे में सारी शुरूआती जानकारियों के लिए आपके सबसे काम की प्रमाणिक चीज यूपीएससी की वेबसाइट पर उपलब्ध इसकी नोटिस है जिसमे उस वर्ष परीक्षा के प्रारूप, सिलेबस और योग्यता जैसी सारी जानकारी उपलब्ध होती है. आप लोगों की सुविधा के लिए मैं इसका लिंक इस ब्लॉग के सबसे ऊपर में  दे रहा हूँ.

वैसे आप http://www.upsc.gov.in/ में जाकर एग्जामिनेशन के लिंक में जाकर भी नोटिफिकेशन में Current लिंक से सिविल सर्विस एग्जाम2015   की नोटिस पीडीऍफ़ में देख सकते हैं.

आशा करता हूँ की ये लिंक इस परीक्षा की शुरुआत कर रहे दोस्तों के लिए लाभप्रद होगा. विशेषकर ग्यारहवीं -बारहवीं कक्षा के छात्रों, और डिग्री कोर्स कर रहे छात्रों के लिए जो सिविल सेवा की तयारी करना चाहते हैं, या इसके बारे में पूरी जानकारी चाहते हैं, उनके लिए यह लिंक काफी मददगार होगा.

शुभकामनाओं के साथ,

केशवेन्द्र कुमार, आईएस
जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, वायनाड जिला
केरल

मंगलवार, 29 जुलाई 2014

दुनिया को कह दो की गाँधी को अंग्रेजी नहीं आती

आजादी की पूर्वसंध्या में
एक महान मनीषी आत्मा ने
दुनिया के बहाने अपने देशवासियों को पैगाम दिया था
भाषिक गुलामी की केंचुले उतार फेंकने को
उनके देशवासी गुलामी की केंचुल निकालने की आधी-अधूरी कोशिश में,
आज तक अंग्रेजी की खूंटी से उल्टे टंगे हैं.
मामला क्या है?
केंचुल है कि उतरती ही नही
या कि केंचुल के अन्दर का प्राणी
केंचुल से बाहर आना ही नहीं चाहता.

गाँधी के लिए मातृभाषा माँ-जैसी थी
कहा था गाँधी ने की माँ जैसी भी हो
बच्चे को जीवनदायी अमृत माँ से ही मिलता है
पर हमारी बोतलबंद दूध पर पली पीढी को
माँ के दूध के स्वाद और मातृभाषा की मिठास का क्या पता
बोतलबंद दूध की तरह बोतलबंद भाषा भी
समा चुकी है हमारी नस-नस में
(क्षीण करती हुई हमारी जीवनीशक्ति को)

सुना है की दो सगे भाइयों को
विदेशी भाषा में बाते करते सुन मर्माहत हुए थे गाँधी
कहा था की जिस देश के लोग इस कदर मानसिक गुलाम हों
उस देश को आजादी मिलकर भी क्या खाक मिलेगी?
और आज हमारे आजाद भारतवर्ष में ये आलम है
की माँ-बाप अपने छोटे बच्चों के सामने
अपनी भाषा में नही अंग्रेजी में बातें करते हैं
ताकि अनायास ही सीख सके बच्चा फर्र-फर्र अंग्रेजी
अपनी भाषा में वो हकलाता हो तो भी कोई बात नही.

अंग्रेजी से कोई शिकायत नही थी तुम्हे गाँधी
काफी अच्छी अंग्रेजी आती थी तुम्हे
तुमने तो कही थी ये बात इसलिए
की लोग अंग्रेजी जाने पर अंग्रेज न बने
तुमने तो चाहा था गाँधी कि
सारा भारत अपनी-अपनी भाषाओँ में बात करे
और हिन्दुस्तानी सारी भाषाओँ के मोतियों को
धागे की तरह पिरो कर रखे एक माला में
पर किसने सुनी तुम्हारी गाँधी, किसने सुनी?
तुम्हारे विचारों की हत्या करने वाले हर शख्श ने यही कहा-
मैं तो गाँधी का पुजारी हूँ, मैंने गाँधी को नही मारा!

गाँधी, तुम कितना पीछे छूट गए हो
भारत कितना पीछे छूट गया है
इंडिया की हैरतंगेज रफ्तार तो देखो
तीन पीढियों में चाल-ढाल ही नही जुबान भी बदल गई है इसकी
गाँधी, तुम होते तो दीवारों से सर फोड़ लेते अपना
हम भी हैं की दीवारों पर सर पटक रहे हैं
उम्मीद है कि इस बार सर नही फूटेगा, दीवार टूटेगी
केंचुल जो अब तक अटकी पड़ी है, इस बार छूटेगी.
(गाँधी, नाउम्मीद न हो, भारत मरा नहीं, जिन्दा है!)

(Keshvendra- September 2009)

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

सिविल सेवा परीक्षा के लिए हिंदी भाषा और साहित्य वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम

सिविल सेवा परीक्षा के लिए हिंदी भाषा और साहित्य वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम

मुख्य परीक्षा में हिंदी वैकल्पिक विषय के 250 अंकों के दो पत्र (कुल 500 अंक )हैं | पहला पत्र हिंदी भाषा और साहित्य के इतिहास पर केन्द्रित है | दूसरे पत्र में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं की कृतियों का आस्वादन और उनपर केन्द्रित सवाल पूछे जायेंगे |

हिंदी प्रश्नपत्र 1
(उत्तर हिंदी में लिखने होंगे )
खंड 'क'
1.हिंदी भाषा एवं नागरी लिपि का इतिहास

१)अपभ्रंश, अवहट्ट एवं आरम्भिक हिंदी का व्याकरणिक एवं अनुप्रयुक्त स्वरुप
२)मध्यकाल में ब्रज एवं अवधी का साहित्यिक भाषा के रूप में विकास
३)सिद्धनाथ साहित्य, खुसरो, संत साहित्य, रहीम आदि कवियों एवं दक्खिनी हिंदी में खड़ी बोली हिंदी का प्रारंभिक स्वरुप
४)उन्नीसवीं शताब्दी में खड़ी बोली और नागरी लिपि का विकास
५)हिंदी भाषा और नागरी लिपि का मानकीकरण
६)स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का विकास
७)भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में हिंदी का विकास
८)हिंदी भाषा का वैज्ञानिक और तकनीकी विकास
९)हिंदी की प्रमुख बोलियां और उनका परस्पर सम्बन्ध
१०)नागरी लिपि की प्रमुख विशेषताएँ और उसके सुधार के प्रयास तथा मानक हिंदी का स्वरुप
११)मानक हिंदी की व्याकरणिक संरचना

खंड 'ख'
2. हिंदी साहित्य का इतिहास 
१)हिंदी साहित्य की प्रासंगिकता और महत्त्व तथा हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा
 २) हिंदी साहित्य के इतिहास के निम्नलिखित चार कालों की साहित्यिक प्रवृतियाँ
क) आदिकाल- सिद्ध, नाथ एवं रासो साहित्य
    प्रमुख कवि- चंदरवरदाई, खुसरो, हेमचन्द्र, विद्यापति
ख) भक्तिकाल- संत काव्यधारा, सूफी काव्यधारा, कृष्णभक्तिधारा एवं रामभक्तिधारा
     प्रमुख कवि- कबीर, जायसी, सूर एवं तुलसी
ग) रीतिकाल- रीतिकाव्य, रीतिबद्ध काव्य एवं रीतिमुक्त काव्य
     प्रमुख कवि- केशव, बिहारी, पद्माकर एवं घनानंद
घ) आधुनिक काल
   *नवजागरण, गद्य का विकास, भारतेंदु मंडल
   *प्रमुख लेखक- भारतेंदु, बालकृष्ण भट्ट एवं प्रताप नारायण मिश्र
   *आधुनिक हिंदी कविता की प्रमुख प्रवृतियाँ : छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नयी कविता, नवगीत,       समकालीन कविता और जनवादी कविता
 प्रमुख कवि- मैथिलीशरण गुप्ता, प्रसाद, निराला, महादेवी, दिनकर, अज्ञेय, मुक्तिबोध, नागार्जुन

३) कथा साहित्य 
 क)उपन्यास और यथार्थवाद
 ख)हिंदी उपन्यासों का उद्भव और विकास
 ग) प्रमुख उपन्यासकार - प्रेमचंद, जैनेन्द्र, यशपाल, रेणु एवं भीष्म साहनी

 घ) हिंदी कहानी का उद्भव और विकास
 ड.)प्रमुख कहानीकार - प्रेमचंद, प्रसाद, अज्ञेय, मोहन राकेश एवं कृष्णा सोबती

४) नाटक और रंगमंच
 क)हिंदी नाटक का उद्भव और विकास
 ख) प्रमुख नाटककार - भारतेंदु, जयशंकर प्रसाद, जगदीश चन्द्र माथुर, रामकुमार वर्मा, मोहन राकेश
 ग) हिंदी रंगमंच का विकास

५) आलोचना 
 क)हिंदी आलोचना का उद्भव एवं विकास
   सैधांतिक, व्यवहारिक, प्रगतिवादी, मनोविश्लेषणवादी एवं नयी आलोचना
  ख) प्रमुख आलोचक- रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास वर्मा एवं नगेन्द्र

६) हिंदी गद्य की अन्य विधाएँ 
  ललित निबंध, रेखाचित्र, संस्मरण, यात्रा-वृतांत




प्रश्न पत्र -2
(उत्तर हिंदी में लिखने होंगे )

इस प्रश्न पत्र में निर्धारित मूल पाठ्य पुस्तकों को पढना अपेक्षित होगा और ऐसे प्रश्न पूछे जायेंगे जिससे अभ्यर्थी की आलोचनात्मक क्षमता की परीक्षा हो सके |

खंड 'क' 
(पद्य )
1. कबीर : कबीर ग्रंथावली, संपादक श्यामसुंदर दास (आरंभिक 100 पद )
2. सूरदास: भ्रमरगीत सार, संपादक रामचंद्र शुक्ल (आरंभिक 100 पद )
3. तुलसीदास: रामचरितमानस (सुंदर कांड)
                      कवितावली (उत्तरकाण्ड )
4. जायसी : पद्मावत, संपादक श्यामसुंदर दास (सिंघल द्वीप खंड एवं नागमती वियोग खंड)
5. बिहारी : बिहारी रत्नाकर, संपादक जगन्नाथ प्रसाद रत्नाकर ( आरंभिक 100 दोहे )
6. मैथिली शरण गुप्त : भारत भारती
7. जयशंकर प्रसाद : कामायनी (चिंता और श्रद्धा सर्ग )
8. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला : राग-विराग, संपादक रामविलास शर्मा ('राम की शक्ति पूजा' और 'कुकुरमुत्ता' )
9. रामधारी सिंह दिनकर : कुरुक्षेत्र
10. अज्ञेय : आँगन के पार द्वार (असाध्य वीणा )
11. मुक्तिबोध : ब्रह्मराक्षस
12. नागार्जुन : बादल को घिरते देखा है, अकाल के बाद, हरिजन गाथा


खंड 'ख'
(गद्य)
1. भारतेंदु : भारत दुर्दशा
2. मोहन राकेश : आषाढ़ का एक दिन
3. रामचंद्र शुक्ल : चिंतामणि (भाग 1)- 'कविता क्या है' , 'श्रद्धा और भक्ति'
4. डॉ सत्येन्द्र : निबंध निलय - बालकृष्ण भट्ट, प्रेमचंद, गुलाब राय, हजारी प्रसाद द्विवेदी, राम विलास शर्मा,     अज्ञेय, कुबेर नाथ राय
5. प्रेमचंद : गोदान
                प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ट कहानियां, संपादक अमृत राय / मंजूषा- प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियां,                           संपादक अमृत राय
6.जयशंकर प्रसाद : स्कंदगुप्त
7.यशपाल : दिव्या
8. फणीश्वर नाथ रेणु : मैला आँचल
9. मन्नू भंडारी : महाभोज
10.राजेंद्र यादव : एक दुनिया समानांतर( सभी कहानियां)

आशा है कि हिंदी भाषा एवं साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में रखने वाले अभ्यर्थी इससे लाभान्वित होंगे | हिंदी भाषा एवं साहित्य वैकल्पिक विषय की तैयारी के बारे में अपने अनुभव और मार्गदर्शन को लेकर मैं शीघ्र ही हाजिर होऊंगा |
----केशवेन्द्र कुमार आईएएस ----

बुधवार, 11 दिसंबर 2013

हिंदी माध्यम में सिविल सेवा की स्तरीय किताबों की तलाश

सिविल सेवा की तैयारी हिंदी माध्यम से करने वाले अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल किताबों की उपलब्धता का होता है | सामान्य अध्ययन के लिए तो अब ढेर सारी स्तरीय पुस्तकें उपलब्ध हैं मगर वैकल्पिक विषय में अच्छी किताबों के चयन में छात्रों को परेशानी आती है | वैसे भी अच्छी पुस्तकें तलाशनी पड़ती है | एक ही विषय पर उपलब्ध ढेर सारी किताबों में से आपके लिए कौन सबसे अच्छी रहेगी, ये तो आपको खुद ही जांचना-परखना पड़ेगा |

इस आलेख में मैं आपके साथ हिंदी माध्यम में उपलब्ध विभिन्न प्रकाशनों की स्तरीय किताबें शेयर करने की विनम्र कोशिश कर रहा हूँ | हिंदी माध्यम में उपलब्ध पुस्तकों की विषयवार सूची का अभाव इस आलेख की प्रेरणा है | आप सभी अभ्यर्थी भी विषयवार पुस्तकों के बारे में अपने सुझाव और अनुभव यहाँ बांट सकते हैं |

साथ ही आप सबों को मेरी सलाह रहेगी कि पुस्तक मेलों और अपने आस-पास उपलब्ध अच्छे पुस्तकालयों का जमकर प्रयोग करें | एक ही विषय पर दो-तीन लेखकों को पढना आपके ज्ञान और विचार को गहराई और गंभीरता देगा |

१. हिंदी माध्यम क्रियान्वयन निदेशालय की पुस्तकें -
दिल्ली विश्वविद्यालय के इस अंग ने हिंदी माध्यम में स्तरीय पुस्तकें उपलब्ध करने में अहम् भूमिका निभायी है | मानविकी के लगभग सारे विषयों में इनकी स्तरीय पुस्तकें उपलब्ध हैं | खासकर इतिहास और राजनीति शास्त्र विषय में इनकी पुस्तकों का जवाब नहीं |
इनकी नई पुस्तक सूची के लिए इस लिंक को खोले-
http://www.du.ac.in/index.php?id=110

इस प्रकाशन की सबसे उल्लेखनीय पुस्तकें हैं-
इतिहास वैकल्पिक विषय
आधुनिक विश्व का इतिहास - लालबहादुर वर्मा
प्राचीन भारत का इतिहास - झा एवं श्रीमाली
मध्यकालीन भारत भाग एक एवं दो- संपादक हरिश्चंद्र वर्मा
आधुनिक भारत का इतिहास- संपादक रामलखन शुक्ल
(इतिहास खंड की अन्य पुस्तकें भी इस विषय की गहन तैयारी के लिए देखी जा सकती है |)
राजनीति विज्ञान वैकल्पिक विषय हेतु 
राजनीति सिद्धांत -संपादक ज्ञान सिंह संधू
बदलती दुनिया में भारत की विदेश नीति भाग एक एवं दो - वी पी दत्ता
भारत में उपनिवेशवाद एवं राष्ट्रवाद- संपादक हिमांशु राय
संयुक्त राष्ट्र संघ - नीना शिरीष
नारीवादी राजनीति- संघर्ष एवं मुद्दे - संपादक- साधना, विवेदिता एवं जिनी
पाश्चात्य राजनीतिक चिंतन - सुब्रत मुख़र्जी एवं सुशीला रामास्वामी
भारतीय संसद-समस्याएँ एवं समाधान - सुभाष कश्यप
सामान्य अध्ययन हेतु
आजादी के बाद का भारत - विपिन चन्द्र, मृदुला मुख़र्जी, आदित्य मुख़र्जी

२. इग्नू की BA एवं MA की पुस्तकें
 सिविल सेवा के वैकल्पिक विषयों की हिंदी माध्यम में तैयारी के लिए इग्नू के पुस्तकों की महत्ता सर्वविदित है | विषय विद्वानों की उत्कृष्ट टीम द्वारा तैयार किये गए इनकी किताबें सिविल सेवा की तैयारी के बिंदु से काफी महत्त्वपूर्ण है | साथ ही हर विषय की पुस्तिका में उस विषय के सारे उत्कृष्ट सन्दर्भ ग्रंथों की सूची उपलब्ध है | इग्नू की पुस्तकें आप इग्नू के दिल्ली ऑफिस से खरीद सकते हैं | इग्नू की पुस्तकें पीडीऍफ़ फॉर्मेट में इन्टरनेट पर फ्री उपलब्ध है | लिंक है -
http://www.egyankosh.ac.in/

3. एस. चाँद प्रकाशन की पुस्तकें -
 इस प्रकाशन ने सामान्य अध्ययन और सी सैट पेपर के लिए हिंदी माध्यम में काफी अच्छी पुस्तकें प्रकाशित की है | यशपाल एवं ग्रोवर की 'आधुनिक भारत का इतिहास' जैसी पुस्तकों ने तो वाकई इतिहास ही रचा है | पुस्तक सूची के लिए लिंक देखे -
http://www.schandgroup.com

सामान्य अध्ययन हेतु-
आधुनिक भारत का इतिहास - यशपाल एवं ग्रोवर
सरल अंकगणित- आर एस अग्रवाल
भारतीय अर्थव्यवस्था - अश्विनी महाजन एवं गौरव दत्त
हिंदी भाषा एवं साहित्य पत्र हेतु -
हिंदी लोकोक्तियाँ एवं मुहावरे- बाबू  गुलाब राय


4. टाटा मैकग्रा हिल प्रकाशन -
 इस प्रकाशन की हिंदी माध्यम की पुस्तकें प्रारंभिक परीक्षा एवं मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पत्र  की तैयारी के लिए काफी उपयोगी है | लक्ष्मीकांत की राज्यव्यवस्था एवं पुष्पेश पन्त की अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध जैसी काफी अच्छी पुस्तकें इस प्रकाशन ने दी है | पुस्तक सूची के लिए इस लिंक को देखे |
http://www.tmhshop.com/test-prep/civil-service-examination-hindi

सामान्य अध्ययन पत्र हेतु-
भारतीय शासन - एम लक्ष्मीकांत
भारत एवं विश्व का भूगोल - माजिद हुसैन
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास - शीलवंत सिंह
21 वीं शताब्दी में अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध - पुष्पेश पन्त
भारत की विदेश नीति- पुष्पेश पन्त

लोक प्रशासन वैकल्पिक विषय हेतु
समग्र लोक प्रशासन - माहेश्वरी
21 वीं शताब्दी में लोक प्रशासन - दुबे
प्रशासनिक विचारधाराएँ- दुबे

राजनीति विज्ञान वैकल्पिक विषय हेतु-
राजनीति विज्ञान - एन डी अरोरा

समाज शास्त्र वैकल्पिक विषय हेतु-
समाज शास्त्र - पांडे

भूगोल वैकल्पिक विषय हेतु-
भूगोल सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के लिए- खुल्लर
भौगोलिक मानचित्रावली - हुसैन



५.उपकार  प्रकाशन की पुस्तकें -
 इस प्रकाशन की पत्रिका प्रतियोगिता दर्पण ने सिविल सेवा के हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों का लम्बे समय से मार्गदर्शन किया है | इस प्रकाशन की किताबें सामान्य अध्ययन पत्र के लिए काफी उपयोगी है |
http://upkar.in/books.aspx?SCID=29

भारतीय अर्थव्यवस्था अतिरिक्तांक
कला एवं संस्कृति अतिरिक्तांक

६. प्रकाशन विभाग की पुस्तकें -
 भारत सरकार के अधीन इस संस्थान की पत्रिकाएँ योजना और कुरुक्षेत्र सिविल सेवा की तैयारी के लिए अपरिहार्य है | साथ ही इसकी कुछ अन्य पुस्तकें जैसे 'आधुनिक भारत के निर्माता' श्रृंखला की पुस्तकें, संत कवि एवं गाँधी जी से जुडी पुस्तकें  सामान्य अध्ययन और निबंध पत्र के लिए उपयोगी है |
http://www.publicationsdivision.nic.in/Hindi/380HindiBooks.pdf


७. प्रतियोगिता साहित्य प्रकाशन -
 राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, भूगोल, समाज शास्त्र, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध जैसे विषयों पर इस प्रकाशन की पुस्तकें वैकल्पिक विषय की तैयारी के साथ सामान्य अध्ययन एवं निबंध पत्र की तैयारी के लिए भी काफी उपयोगी है |
http://www.psagra.in/product-category/iaspcs-mains-exam/ias-hindi/

सामान्य अध्ययन के लिए-
भारतीय शासन एवं राजनीति - फड़िया

राजनीति विज्ञान वैकल्पिक विषय हेतु-
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति - बी एल फडिया

लोक प्रशासन वैकल्पिक विषय हेतु
भारत में लोक प्रशासन - बी एल फडिया
भारतीय प्रशासन - बी एल फडिया

समाज शास्त्र वैकल्पिक विषय हेतु-
समाज शास्त्र - प्रो.एम एल  गुप्ता एवं डॉ डी डी शर्मा

भूगोल वैकल्पिक विषय हेतु-
भारत का बृहत् भूगोल -डॉ चतुर्भुज मामोरिया


८.  अरिहंत प्रकाशन 
 इस प्रकाशन ने सामान्य अध्ययन के प्रारंभिक पत्र के लिए कुछ अच्छी पुस्तकें प्रकाशित की है | इस प्रकाशन के द्वारा प्रकाशित प्रारंभिक परीक्षा के क्वेश्चन बैंक अवश्य खरीदने योग्य है |
http://www.arihantbooks.com/Store/1/5/Entrance-Exam/Civil-Services

९. सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल 
 इस प्रकाशन की पत्रिका सिविल सेवा की तैयारी के लिए काफी उपयोगी है | इस प्रकाशन की कुछ पुस्तकें भी सामान्य अध्ययन पत्र की तैयारी के लिए काफी महत्तवपूर्ण है | इस प्रकाशन के हल किये हुए मुख्य परीक्षा के क्वेश्चन बैंक अवश्य खरीदने योग्य  है | सिविल सर्विसेज प्लानर भी नए अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी है |
http://www.chronicleindia.in/our-books

10. पुस्तक महल -
 इस प्रकाशन की हिंदी माध्यम की कुछ पुस्तकें सामान्य अध्ययन पत्र तथा आपकी हॉबी  की तैयारी के लिए उपयोगी है | हालाँकि काफी सतर्क चयन की जरुरत है क्योंकि किताबों की भरमार से उपयोगी किताब ढूँढने में काफी श्रम लगता है |
http://www.pustakmahal.com/books/

११. स्पेक्ट्रम प्रकाशन -
इस प्रकाशन की पुस्तकें सामान्य अध्ययन पत्र के लिए उपयोगी है |
http://spectrumbooks.in/books/hindi/

१२. कम्पीटीशन सक्सेस रिव्यु -
 इस प्रकाशन की पत्रिका निबंध एवं साक्षात्कार की तैयारी के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है | साक्षात्कार के लिए इस प्रकाशन की पुस्तक काफी अच्छी है |
http://www.competitionreview.in/publication.php

१३. वाणी प्रकाशन
 निबंध पत्र के लिए इस प्रकाशन की पुस्तकें काफी उपयोगी है |
http://vaniprakashanblog.blogspot.in/

१४. राजकमल प्रकाशन
 हिंदी साहित्य और निबंध पत्र की तैयारी के लिए काफी उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध |
http://www.rajkamalprakashan.com/

१५. साहित्य अकादमी -
हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों के लिए इस प्रकाशन की पुस्तकें विशेषकर 'साहित्य निर्माता' सीरीज की पुस्तकें काफी काम की है |
http://sahitya-akademi.gov.in/

साथियों, हिंदी माध्यम में सिविल सेवा की तैयारी के लिए पुस्तकें प्रकाशित करने वाले प्रमुख प्रकाशकों की प्रारंभिक सूची मैंने आप लोगों के सामने अपने सीमित ज्ञान के आधार पर रखी है | कुछ अन्य महत्तवपूर्ण प्रकाशन जो यहाँ आने से रह गए हैं, उन्हें मैं  धीरे-धीरे विस्तृत विवरण के साथ आप लोगों के सामने लाने की कोशिश करूँगा | साथ ही सारे प्रकाशनों से सबसे अच्छी पुस्तकों के बारे में भी थोड़े और विस्तार से लिखूंगा | आप लोगों से भी अनुरोध है की आप अपने सुझाव भेजे |  हिंदी साहित्य के वैकल्पिक पत्र के लिए ढेर सारे साहित्यिक प्रकाशन हैं जिनकी चर्चा मैं अपने एक अलग आलेख में करूँगा |

हंस की तरह नीर-क्षीर विवेक से अपने लिए सबसे उत्तम पुस्तकों का चयन करे | अगर आपने अच्छी पुस्तकों को अपना मित्र बनाया तो जीवन भर सफलता आपकी संगिनी बनी रहेगी और आप जीवन के हर पड़ाव से हँसते-मुस्कुराते गुजरेंगे |

सफलता की शुभकामनाओं के साथ,
केशवेन्द्र कुमार, आईएएस

रविवार, 1 दिसंबर 2013

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2013- शुभकामनाएँ एवं निबंध पत्र हेतु सुझाव

कल से सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की शुरुआत हो रही है | सबसे पहले मैं इस परीक्षा में शामिल हो रहे प्रतिभागियों को ढेर सारी शुभकामनाएँ देता हूँ और उनकी सफलता की दुआ करता हूँ | फिर कुछ आखिरी घड़ी की नसीहतें, अनुभव उनके साथ बांटना चाहूँगा |

सिविल सेवा में सफलता के लिए मुख्य परीक्षा को अच्छे अंकों से पास करना  एक तरह से निर्णायक भूमिका निभाता है | परीक्षा की इन आखिरी घड़ियों में अच्छी-से अच्छी तैयारी के बावजूद छात्र दवाब में होते हैं | 'क्या छोडू, क्या दुहराऊ' की दुविधा होती है | अपनी तैयारी के बारे में संशय होता रहता है | इस समय के लिए मेरा सुझाव यही होगा कि अपनी तैयारी के बारे में आत्मविश्वस्त रहे | महत्वपूर्ण विषयों का दोहराव करे और परिणाम की चिंता से अपने आपको दवाब में न डाले |

कल का पहला पेपर निबंध का है | इस वर्ष से निबंध के पत्र को काफी महत्त्व दिया गया है और इसके अंक बढाकर 250 कर दिए गए हैं | ऐसे में या तो 250 अंक का  एक निबंध या फिर 125 अंक के  दो निबंध लिखने को कहा जा सकता है | इस पत्र के लिए कुछ सुझाव ध्यान रखें -
* शब्द सीमा- 250 अंक के निबंध के लिए लगभग 2000 से 2500 शब्दों का निबंध लिखे |
*परीक्षा भवन के तीन घंटे में 30 मिनट का समय निबंध के विषय के चयन और उसकी रूपरेखा तैयार करने में लगाये | उत्तर पुस्तिका के आखिरी पन्ने में रफ़ में निबंध के विषय में अपने सारे ज्ञान और विचारों को क्रम बद्ध करके लिख ले | अंत में दस से पंद्रह मिनट का समय निबंध को दुहराने और भाषा या व्याकरण की गलतियों को सुधरने के लिए रखे |
*निबंध की शुरुआत आकर्षक और विषयानुकूल होनी चाहिए | अपनी मौलिकता और कल्पनाशक्ति को यहाँ अच्छे से प्रयोग करे |
*निबंध के मुख्य भाग में विषय को विस्तार दे और क्रमबद्ध तरीके से अपनी बात रखे |
*उपसंहार में अपनी बातों को तार्किक निष्कर्ष तक पहुचाये  और निबंध के निचोड़ को संक्षेप में सामने रखे |
*भाषा सहज-सरल और प्रवाहमयी हो |
*समसामयिक उदाहरणों, प्रेरक प्रसंग, प्रासंगिक लघुकथा, काव्यांश, सूक्ति-उद्धरण का समुचित प्रयोग करे | इनका प्रयोग निबंध के प्रवाह और प्रभाव को बढ़ाने वाला होना चाहिए | ऐसा नहीं लगना चाहिये की आप अपने पांडित्य का प्रदर्शन करने के लिए इन्हें ठूंसे जा रहे हैं |
*विवादस्पद विषय में संतुलित विचार रखे - विषय के दोनों पक्षों को सामने रखकर फिर अपने निष्कर्ष तर्क सहित रखे |
*संवैधानिक मूल्यों और देश के प्रति प्रेम और आदर का ध्यान रखे | आपके निबंधों का स्वर और निष्कर्ष नकारात्मक न हो, इसका भी ख्याल रखे | यदि आप किसे ऐसे विषय के बारे में लिख रहे हो जहाँ वर्तमान परिदृश्य बिलकुल नकारात्मक है, वहां भी सुधार कैसे लाया जा सकता है, उसको प्रधानता दे |

आप सबों को मेरी तरफ से ढेर सारी शुभकामनाएँ |

केशवेन्द्र कुमार, आईएएस

सोमवार, 16 सितंबर 2013

चलो मनाये हिंदी दिवस को भारतीय भाषा दिवस के रूप में

हिंदी दिवस और हिंदी पखवाड़ों के आयोजन की औपचारिकता सारे देश में जारी है | इन औपचारिकताओं से हिंदी का कितना भला होने वाला है, यह तो इतने सालों में भी जनता की समझ में नहीं आया | राजभाषा दिवस, राजभाषा विभाग, राजभाषा आयोग- इन सारे सफ़ेद हाथियों ने हिंदी को उसकी अन्य भारतीय बहन भाषाओं से दूर ला कर खड़ा कर दिया |
 मेरी नजर में हिंदी भाषा अपनी सारी भारतीय बहन भाषाओं के साथ एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है | तकनीकी क्रांति के इस युग में एक संभावना तो यह है की ये सारी भाषाएँ शिक्षा और रोजगार की भाषा बन कर उभरे | वहीं एक संभावना यह है की अंग्रेजी का प्रभुत्त्व हिंदी के साथ-साथ सारी भारतीय भाषाओं को हाशिये पर धकेल दे | अंग्रेजी जिस तरह से शिक्षा और रोजगार की भाषा के रूप में भारतीय भाषाओं को विस्थापित कर रही है, उसे देखते हुए ऐसी आशंका होना लाजमी भी है |  

भाषा की राजनीति को परे रख जिस एक कदम से हम हिंदी के साथ-साथ सारी भारतीय भाषाओं को फलने-फूलने में और राष्ट्रीय एकता फ़ैलाने में मदद दे सकते हैं वो है पूरे भारत में भाषा के पठन-पाठन की त्रिभाषा प्रद्धति को लागू करना | मातृभाषा, हिंदी/भारतीय भाषा/ अंग्रेजी इस रूप में यदि तीन भाषाओं को सारे राज्य में बच्चों को पढाना अनिवार्य कर दिया जाया तो भारत की भाषा की समस्या का शाश्वत समाधान हो सकता है  यदि अहिन्दी भाषी राज्य अपने यहाँ हिंदी को बच्चों को दूसरी भाषा के रूप में  पढाये  तो उसके बदले में हिंदी भाषी राज्यों को अपने यहाँ कोई एक भारतीय भाषा बच्चों को अनिवार्य रूप से पढ़नी चाहिए | कल्पना कीजिये की यदि बिहार के बच्चे मलयालम सीखे, उत्तर प्रदेश में दूसरी भाषा के रूप में तमिल पढाई जाए, मध्य प्रदेश अपने बच्चों को तेलुगु पढाये, राजस्थान में कन्नड़ विद्यालयों में बच्चों को दूसरी भाषा के रूप में पढाई जाये और इसी भांति भारत का हर राज्य अपने बच्चों को मातृभाषा, हिंदी(हिंदी भाषी क्षेत्रों में कोई अन्य भारतीय भाषा) एवं अंग्रेजी, इन तीन भाषाओं की शिक्षा दे तो फिर हिंदी के साथ सारी भारतीय भाषाएँ भी प्रगति करेंगी और सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच की जो भाषिक खाई है, उसे भी पाटा जा सकेगा |

हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच संवाद अभी वक़्त की मांग है | भारतीय भाषाओं में उच्च कोटि के मौलिक लेखन के साथ विश्व की हर भाषा की उत्कृष्ट कृति के अनुवाद की व्यवस्था होनी चाहिए | साहित्यकारों को उनका समुचित सम्मान मिलना चाहिए | जिस भाषा के साहित्यकार हाशिये पर धकेले जाते हो, उस भाषा के दिन गिने-चुने होते हैं हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं को इन्टरनेट पर भी बढ़ावा दिए जाने की जरुरत है |


मैं तो यही कहूँगा की हिंदी दिवस को हम यदि भारतीय भाषा दिवस के रूप में मानते हुए हर भारतीय भाषा की प्रगति में अपना अंशदान देने का प्रण ले, तभी हम हिंदी के साथ ही समस्त भारतीय भाषाओं के प्रति अपना कर्तव्य निभा पायेंगें |

इस अवसर पर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बारे में लिखी अपनी एक पुरानी कविता आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत है -


कितनी भाषाओँ से कितनी बार

कितनी भाषाओँ से कितनी बार
गुजरते हुए मैंने जाना है की
हर भाषा संजोये होती है
एक अलग इतिहास, संस्कृति और सभ्यता
की हर भाषा में उसके बोलने वालों की हर
ख़ुशी और गम का सारा हिसाब-किताब मौजूद होता है.

हर वो भाषा जो और भाषाओँ को मानती है बहन
और नही रखती उनकी प्रगति से कोई डाह-द्वेष
उनको आकर छलती है कोई साम्राज्यवादी भाषा
कहती है की अब इस भाषा में नए समय को
व्यक्त नही कर सकते, पर चिंता क्यूँ है, मैं हूँ ना!

और धीरे-धीरे इक भाषा दूसरी भाषा को
अपनी गुलामी करने को मजबूर करती है
उनको छोड़ देती है उन लोगों के लिए
जिनके मुख से अपना बोला जाना उसे नागवार है
आखिर मजदूरों, भिखारियों, आदिवासियों,
बेघरों, वेश्याओं, यतीमों, अनपढों या एक शब्द में कहे
तो हाशिये पर जीने वालों के लिए भी तो कोई
भाषा होनी चाहिए ना?

कितनी भाषाओँ से कितनी बार गुजरते हुए महसूसा है मैंने
कितनी ममता होती है हर एक भाषा में
कितनी आतुर स्नेहकुलता से अपनाती है
वो हर उस बच्चे को जो उसकी गोदी में
आ पहुंचा है बाहें पसारे, बच्चा-
जिसे अभी तक तुतलाना तक नही आता नयी भाषा में.

कितनी भाषाओँ से कितनी बार गुजरते हुए
मैंने महसूसा है की भाषा कभी भी
थोपकर नही सिखाई जा सकती,
जबतक अन्दर से प्रेम नही जागा हो,
भाषा जुबान पर भले चढ़े, दिल पर नही चढेगी.

कितनी भाषाओँ से कितनी बार गुजरते हुए
देखा है मैंने की सत्ता और बाजार ने
हर बार कोशिश की है, और अब भी कर रहे हैं
भाषा को अपना मोहरा बनाने की
पर भाषा है की हर बार आम आदमी के पक्ष में
खड़ी हो गयी इस बात की परवाह किये बिना
की कौन खडा है सामने.

कितनी भाषाओँ से कितनी बार गुजरते हुए
जाना है की संवाद चाहती है भाषाएँ
भाषाओँ को बोलनेवाले लोग
भाषाओँ में लिखने वाले साहित्यकार
एक-दुसरे से
पर भाषा की राजनीति करने वाले
नही चाहते ऐसा और खडा कर देते है
सगी बहन जैसी भाषाओँ को एक-दुसरे के विरूद्व
उनकी मर्जी के खिलाफ.

भाषाओँ के साथ दिक्कत यही है
की हर भाषा में चीखता हुआ इन्सान
सबसे दूर तक सुना जाता है
और अच्छे इंसानों की खामोशी बस उन्ही तक
सिमट कर रह जाती है.
भाषा को बचाए रखने के लिए
भाषा में अच्छे इंसानों की चीख अब बहुत जरुरी है.