मंगलवार, 29 जुलाई 2014

दुनिया को कह दो की गाँधी को अंग्रेजी नहीं आती

आजादी की पूर्वसंध्या में
एक महान मनीषी आत्मा ने
दुनिया के बहाने अपने देशवासियों को पैगाम दिया था
भाषिक गुलामी की केंचुले उतार फेंकने को
उनके देशवासी गुलामी की केंचुल निकालने की आधी-अधूरी कोशिश में,
आज तक अंग्रेजी की खूंटी से उल्टे टंगे हैं.
मामला क्या है?
केंचुल है कि उतरती ही नही
या कि केंचुल के अन्दर का प्राणी
केंचुल से बाहर आना ही नहीं चाहता.

गाँधी के लिए मातृभाषा माँ-जैसी थी
कहा था गाँधी ने की माँ जैसी भी हो
बच्चे को जीवनदायी अमृत माँ से ही मिलता है
पर हमारी बोतलबंद दूध पर पली पीढी को
माँ के दूध के स्वाद और मातृभाषा की मिठास का क्या पता
बोतलबंद दूध की तरह बोतलबंद भाषा भी
समा चुकी है हमारी नस-नस में
(क्षीण करती हुई हमारी जीवनीशक्ति को)

सुना है की दो सगे भाइयों को
विदेशी भाषा में बाते करते सुन मर्माहत हुए थे गाँधी
कहा था की जिस देश के लोग इस कदर मानसिक गुलाम हों
उस देश को आजादी मिलकर भी क्या खाक मिलेगी?
और आज हमारे आजाद भारतवर्ष में ये आलम है
की माँ-बाप अपने छोटे बच्चों के सामने
अपनी भाषा में नही अंग्रेजी में बातें करते हैं
ताकि अनायास ही सीख सके बच्चा फर्र-फर्र अंग्रेजी
अपनी भाषा में वो हकलाता हो तो भी कोई बात नही.

अंग्रेजी से कोई शिकायत नही थी तुम्हे गाँधी
काफी अच्छी अंग्रेजी आती थी तुम्हे
तुमने तो कही थी ये बात इसलिए
की लोग अंग्रेजी जाने पर अंग्रेज न बने
तुमने तो चाहा था गाँधी कि
सारा भारत अपनी-अपनी भाषाओँ में बात करे
और हिन्दुस्तानी सारी भाषाओँ के मोतियों को
धागे की तरह पिरो कर रखे एक माला में
पर किसने सुनी तुम्हारी गाँधी, किसने सुनी?
तुम्हारे विचारों की हत्या करने वाले हर शख्श ने यही कहा-
मैं तो गाँधी का पुजारी हूँ, मैंने गाँधी को नही मारा!

गाँधी, तुम कितना पीछे छूट गए हो
भारत कितना पीछे छूट गया है
इंडिया की हैरतंगेज रफ्तार तो देखो
तीन पीढियों में चाल-ढाल ही नही जुबान भी बदल गई है इसकी
गाँधी, तुम होते तो दीवारों से सर फोड़ लेते अपना
हम भी हैं की दीवारों पर सर पटक रहे हैं
उम्मीद है कि इस बार सर नही फूटेगा, दीवार टूटेगी
केंचुल जो अब तक अटकी पड़ी है, इस बार छूटेगी.
(गाँधी, नाउम्मीद न हो, भारत मरा नहीं, जिन्दा है!)

(Keshvendra- September 2009)

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

सिविल सेवा परीक्षा के लिए हिंदी भाषा और साहित्य वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम

सिविल सेवा परीक्षा के लिए हिंदी भाषा और साहित्य वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम

मुख्य परीक्षा में हिंदी वैकल्पिक विषय के 250 अंकों के दो पत्र (कुल 500 अंक )हैं | पहला पत्र हिंदी भाषा और साहित्य के इतिहास पर केन्द्रित है | दूसरे पत्र में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं की कृतियों का आस्वादन और उनपर केन्द्रित सवाल पूछे जायेंगे |

हिंदी प्रश्नपत्र 1
(उत्तर हिंदी में लिखने होंगे )
खंड 'क'
1.हिंदी भाषा एवं नागरी लिपि का इतिहास

१)अपभ्रंश, अवहट्ट एवं आरम्भिक हिंदी का व्याकरणिक एवं अनुप्रयुक्त स्वरुप
२)मध्यकाल में ब्रज एवं अवधी का साहित्यिक भाषा के रूप में विकास
३)सिद्धनाथ साहित्य, खुसरो, संत साहित्य, रहीम आदि कवियों एवं दक्खिनी हिंदी में खड़ी बोली हिंदी का प्रारंभिक स्वरुप
४)उन्नीसवीं शताब्दी में खड़ी बोली और नागरी लिपि का विकास
५)हिंदी भाषा और नागरी लिपि का मानकीकरण
६)स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का विकास
७)भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में हिंदी का विकास
८)हिंदी भाषा का वैज्ञानिक और तकनीकी विकास
९)हिंदी की प्रमुख बोलियां और उनका परस्पर सम्बन्ध
१०)नागरी लिपि की प्रमुख विशेषताएँ और उसके सुधार के प्रयास तथा मानक हिंदी का स्वरुप
११)मानक हिंदी की व्याकरणिक संरचना

खंड 'ख'
2. हिंदी साहित्य का इतिहास 
१)हिंदी साहित्य की प्रासंगिकता और महत्त्व तथा हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा
 २) हिंदी साहित्य के इतिहास के निम्नलिखित चार कालों की साहित्यिक प्रवृतियाँ
क) आदिकाल- सिद्ध, नाथ एवं रासो साहित्य
    प्रमुख कवि- चंदरवरदाई, खुसरो, हेमचन्द्र, विद्यापति
ख) भक्तिकाल- संत काव्यधारा, सूफी काव्यधारा, कृष्णभक्तिधारा एवं रामभक्तिधारा
     प्रमुख कवि- कबीर, जायसी, सूर एवं तुलसी
ग) रीतिकाल- रीतिकाव्य, रीतिबद्ध काव्य एवं रीतिमुक्त काव्य
     प्रमुख कवि- केशव, बिहारी, पद्माकर एवं घनानंद
घ) आधुनिक काल
   *नवजागरण, गद्य का विकास, भारतेंदु मंडल
   *प्रमुख लेखक- भारतेंदु, बालकृष्ण भट्ट एवं प्रताप नारायण मिश्र
   *आधुनिक हिंदी कविता की प्रमुख प्रवृतियाँ : छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नयी कविता, नवगीत,       समकालीन कविता और जनवादी कविता
 प्रमुख कवि- मैथिलीशरण गुप्ता, प्रसाद, निराला, महादेवी, दिनकर, अज्ञेय, मुक्तिबोध, नागार्जुन

३) कथा साहित्य 
 क)उपन्यास और यथार्थवाद
 ख)हिंदी उपन्यासों का उद्भव और विकास
 ग) प्रमुख उपन्यासकार - प्रेमचंद, जैनेन्द्र, यशपाल, रेणु एवं भीष्म साहनी

 घ) हिंदी कहानी का उद्भव और विकास
 ड.)प्रमुख कहानीकार - प्रेमचंद, प्रसाद, अज्ञेय, मोहन राकेश एवं कृष्णा सोबती

४) नाटक और रंगमंच
 क)हिंदी नाटक का उद्भव और विकास
 ख) प्रमुख नाटककार - भारतेंदु, जयशंकर प्रसाद, जगदीश चन्द्र माथुर, रामकुमार वर्मा, मोहन राकेश
 ग) हिंदी रंगमंच का विकास

५) आलोचना 
 क)हिंदी आलोचना का उद्भव एवं विकास
   सैधांतिक, व्यवहारिक, प्रगतिवादी, मनोविश्लेषणवादी एवं नयी आलोचना
  ख) प्रमुख आलोचक- रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास वर्मा एवं नगेन्द्र

६) हिंदी गद्य की अन्य विधाएँ 
  ललित निबंध, रेखाचित्र, संस्मरण, यात्रा-वृतांत




प्रश्न पत्र -2
(उत्तर हिंदी में लिखने होंगे )

इस प्रश्न पत्र में निर्धारित मूल पाठ्य पुस्तकों को पढना अपेक्षित होगा और ऐसे प्रश्न पूछे जायेंगे जिससे अभ्यर्थी की आलोचनात्मक क्षमता की परीक्षा हो सके |

खंड 'क' 
(पद्य )
1. कबीर : कबीर ग्रंथावली, संपादक श्यामसुंदर दास (आरंभिक 100 पद )
2. सूरदास: भ्रमरगीत सार, संपादक रामचंद्र शुक्ल (आरंभिक 100 पद )
3. तुलसीदास: रामचरितमानस (सुंदर कांड)
                      कवितावली (उत्तरकाण्ड )
4. जायसी : पद्मावत, संपादक श्यामसुंदर दास (सिंघल द्वीप खंड एवं नागमती वियोग खंड)
5. बिहारी : बिहारी रत्नाकर, संपादक जगन्नाथ प्रसाद रत्नाकर ( आरंभिक 100 दोहे )
6. मैथिली शरण गुप्त : भारत भारती
7. जयशंकर प्रसाद : कामायनी (चिंता और श्रद्धा सर्ग )
8. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला : राग-विराग, संपादक रामविलास शर्मा ('राम की शक्ति पूजा' और 'कुकुरमुत्ता' )
9. रामधारी सिंह दिनकर : कुरुक्षेत्र
10. अज्ञेय : आँगन के पार द्वार (असाध्य वीणा )
11. मुक्तिबोध : ब्रह्मराक्षस
12. नागार्जुन : बादल को घिरते देखा है, अकाल के बाद, हरिजन गाथा


खंड 'ख'
(गद्य)
1. भारतेंदु : भारत दुर्दशा
2. मोहन राकेश : आषाढ़ का एक दिन
3. रामचंद्र शुक्ल : चिंतामणि (भाग 1)- 'कविता क्या है' , 'श्रद्धा और भक्ति'
4. डॉ सत्येन्द्र : निबंध निलय - बालकृष्ण भट्ट, प्रेमचंद, गुलाब राय, हजारी प्रसाद द्विवेदी, राम विलास शर्मा,     अज्ञेय, कुबेर नाथ राय
5. प्रेमचंद : गोदान
                प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ट कहानियां, संपादक अमृत राय / मंजूषा- प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियां,                           संपादक अमृत राय
6.जयशंकर प्रसाद : स्कंदगुप्त
7.यशपाल : दिव्या
8. फणीश्वर नाथ रेणु : मैला आँचल
9. मन्नू भंडारी : महाभोज
10.राजेंद्र यादव : एक दुनिया समानांतर( सभी कहानियां)

आशा है कि हिंदी भाषा एवं साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में रखने वाले अभ्यर्थी इससे लाभान्वित होंगे | हिंदी भाषा एवं साहित्य वैकल्पिक विषय की तैयारी के बारे में अपने अनुभव और मार्गदर्शन को लेकर मैं शीघ्र ही हाजिर होऊंगा |
----केशवेन्द्र कुमार आईएएस ----