गुरुवार, 8 मार्च 2012

IPS ऑफिसर नरेंद्र की शहादत

मध्य प्रदेश कैडर के युवा IPS अधिकारी नरेन्द्र की खनन माफियाओं द्वारा हत्या की खबर झकझोरने वाली है. इस शोक की घड़ी में हम सब उनके परिवारवालों और सबसे बढ़कर उनकी पत्नी और अपनी बैचमेट मधु के साथ हैं. भगवान पर से कभी-कभी विश्वास डोलता हुआ महसूस होता है जब अच्छे लोगों के साथ ऐसी घटना होती है. इन खनन माफियाओं और उनका साथ देने वाले टुच्चे लोगों चाहे वो राजनीति में हो या प्रशासन में, को उनकी असली औकात और जगह (जेल) दिखाए जाने की सख्त जरुरत है.
मध्य प्रदेश में २००९ बैच के जांबाज ईमानदार IPS ऑफिसर नरेंद्र की हत्या के बाद बिहार में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना में भ्रष्टाचार को उजागर करने पर मार डाले गए सत्येन्द्र डूबे और उन जैसे सारे ईमानदार लोगों की शहादत याद आ रही है. इन सारे शहीदों की वीरता को नमन और अपनी  एक पुरानी कविता से श्रद्धांजलि


ईमान मर नहीं सकता


आज के इस भयानक दौर में,
जहाँ ईमान की हर जुबान पर
खामोशी का ताला जडा है.
चाभी एक दुनाली में भरी
सामने धरी है ,

फ़िर भी मैं कायर न बनूँगा
अपनी आत्मा की निगाह में
फ़िर भी मैं, रत्ती भर न हिचकूंगा
चलने में ईमान कि इस राह पे।

मैं अपनी जुबान खोलूँगा
मैं भेद सारे खोलूँगा-
(बेईमानों- भ्रष्टाचारियों की
काली करतूतों के )
मैं चीख-चीख कर दुनिया भर में बोलूँगा-
ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है।

मैं जानता हूँ कि परिणाम क्या होगा-
मेरी जुबान पर पड़ा खामोशी का ताला
बदल जाएगा फांसी के फंदे में
और फंदा कसता जायेगा-
भिंच जायेंगे जबड़े और मुट्ठियाँ
आँखें निष्फल क्रोध से उबलती
बाहर आ जाएँगी
प्राण फसेंगे, लोग हसेंगे
पर संकल्प और कसेंगे.

देह मर जायेगा मगर
आत्मा चीखेगी, अनवरत, अविराम-
''ईमान झुक नहीं सकता,
ईमान मर नही सकता,
चाहे हालत जो भी हो जाये,
ईमान मर नही सकता,
ईमान मर नही सकता.
-2004 -

(स्वर्णिम चतुर्भुज योजना में भष्टाचार को उजागर करने पर जान से हाथ धोने वाले 'यथा नाम तथा गुण' सत्येन्द्र डूबे तथा ईमान की हर उस आवाज को समर्पित जिसने झुकना गवारा ना किया बेईमानी के आगे. )

5 टिप्‍पणियां:

  1. केशवेंद्र जी, काफी दिनों के बाद आपने फिर से अपनी भावनाओं को ब्लॉग के माध्यम से जाहिर करनी शुरू की, यह मेरे जैसे उन सभी छात्रों के लिये हर्ष की बात है जो आप को अपना प्रेरणाश्रोत मानते है.
    दिवंगत पुलिश अधिकारी नरेन्द्र कुमार के सहादत पर इस वक्त देश का हर एक भक्त गमगीन है और साथ की वर्त्तमान राजनितीक कमजोरियो से गुस्सा भी है. लेकिन जबतक देश का हर एक नागरिक संगठित होकर अहिंसात्मक तरीके से वर्त्तमान में सुइस्थापित व्यवस्था के खिलाफ आवाज नहीं उठता है, कोई बड़ी बदलाव की उम्मीद करना अपने आपको धोखे में रखने के बराबर होगा.
    यदा-कदा अन्ना जी जैसे कुछ लोग कमर कस कर अपनी चारित्रिक पवित्रता के बलबूते इस देश की जनता को उद्देलित करने की कोशिश भी करते है लेकिन इस तथाकथित विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में उनके आवाज को यह कह कर दबा दिया जाता है की आप लोक्तंतान्त्रिक तरीके से चुनी गयी सरकार को कुछ दो-चार हजार की आम व्यक्तियों की फ़ौज के बूते चुनौती नहीं दे सकते.
    और सारी उम्मीद फिर से धरी की धरी रह जाती है, हम नेताओ की स्वप्नदर्शी बातों में आप कर उस सुनहरे भविष्य की आस लगाये निश्चिन्तता की नीद में इस उम्मीद में सो जाते है की एक दिन ऐसी सुबह आएगी जब सारा कुछ हमारे अनुरूप हुआ रहेगा.

    हमें उम्मीद है की आप और हम जैसे युवा ईमानदारी पूर्वक इस देश के नागरिकों को उनके अपने वाजिफ हक दिलाने में हर संभव कोशिश करेंगे, और साथ ही इस देश की तस्वीर पर भ्रस्टाचार रूपी लगे धब्बे को मिटाने में अपनी क्षमताओ का सर्वोत्तम उपयोग करेंगे.

    जय हिंद.

    गोविन्द केशरी.

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  2. ♥*♥






    आदरणीय केशवेन्द्र जी
    सस्नेहाभिवादन !

    बहुत सशक्त रचना है आपकी…

    मैं अपनी जुबान खोलूँगा
    मैं भेद सारे खोलूँगा-
    (बेईमानों- भ्रष्टाचारियों की
    काली करतूतों के )
    मैं चीख-चीख कर दुनिया भर में बोलूँगा-
    ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है।

    मैं जानता हूँ कि परिणाम क्या होगा-
    मेरी जुबान पर पड़ा खामोशी का ताला
    बदल जाएगा फांसी के फंदे में
    और फंदा कसता जायेगा-
    भिंच जायेंगे जबड़े और मुट्ठियाँ
    आँखें निष्फल क्रोध से उबलती
    बाहर आ जाएँगी
    प्राण फसेंगे, लोग हसेंगे
    पर संकल्प और कसेंगे.

    देह मर जायेगा मगर
    आत्मा चीखेगी, अनवरत, अविराम-
    ''ईमान झुक नहीं सकता,
    ईमान मर नही सकता,
    चाहे हालत जो भी हो जाये,
    ईमान मर नही सकता,
    ईमान मर नही सकता.

    वाह ! सत्य के प्रति समर्पण और दृढ़ निश्चय को दर्शाती इस रचना द्वारा लेखनी धन्य हुई … आभार !

    हार्दिक शुभकामनाओं-मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  3. केशवेंद्र जी, मुझे आपकी पोस्ट का इंतजार रहता है पर आप बहुत ही कम लिखते हैं|

    यहाँ एक लम्बी लिस्ट हैं जो सोनावड़े और नरेंद्र पर हीं नहीं रुकेगी, आगे भी ये जारी रहने वाला है

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  4. अवनीश जी, सर्विस की व्यस्तताओं के कारण मैं ब्लॉग के लिए समय कम निकाल पा रहा था. परीक्षा में भी धीरे-धीरे आमूलचूल परिवर्तन आ रहा है और केरल में होने की वजह से हिंदी की पत्रिकाओं से थोड़ी दूरी आ गयी थी. मगर मैं फिर से ब्लॉग को नियमित समय देने की सोच रहा हूँ.

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